Gopi Geet Lyrics | गोपी गीत सम्पूर्ण Lyrics & Meaning

Gopi Geet Lyrics complete text and meaning devotional song of gopis

Gopi Geet Lyrics सिर्फ एक भजन या श्लोकों का संग्रह नहीं है — यह प्रेम, विरह, भक्ति और पूर्ण आत्मसमर्पण की वह दिव्य अभिव्यक्ति है, जो सीधे आत्मा को छू जाती है। जब रास लीला के बाद भगवान श्रीकृष्ण अचानक अंतर्धान हो जाते हैं, तब वृंदावन की गोपियाँ जिस पीड़ा, तड़प और निस्वार्थ प्रेम से उन्हें पुकारती हैं — वही पुकार गोपी गीत बन जाती है।

यह गीत श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कंध 10, अध्याय 31) में वर्णित है और इसे कृष्ण-भक्ति का सबसे शुद्ध, भावुक और ऊँचा स्वरूप माना जाता है।


🌸 गोपी गीत क्या है?

गोपी गीत ब्रज की गोपियों द्वारा गाया गया सामूहिक विरह गीत है। इसमें न कोई शिकायत है, न कोई शर्त, न कोई अधिकार — केवल प्रेम है, समर्पण है और हृदय से निकली पुकार है।

गोपी गीत हमें यह सिखाता है कि
जब भक्ति सच्ची होती है, तब भगवान से भी छिपाया नहीं जा सकता।


📜 Gopi Geet Lyrics (संक्षिप्त श्लोक)

(श्रीमद्भागवत 10.31 से प्रमुख श्लोक)

जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः
श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि।
दयित दृष्टतां दिक्षु तावका
त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते॥

हासि चासि हृतं प्रसीदतां
प्रिय दर्शनेन स्नेहभाजाम्।
तव कथामृतं तप्तजीवनं
कविभिरीडितं कल्मषापहम्॥

👉 गोपी गीत में कुल 19 श्लोक हैं। ऊपर दिए गए श्लोक सबसे अधिक प्रसिद्ध और भावपूर्ण माने जाते हैं।


🪔 गोपी गीत का सरल अर्थ (Hindi Meaning)

“हे प्रिय कृष्ण!
आपके जन्म से व्रजभूमि धन्य हो गई।
लक्ष्मीजी भी सदा यहाँ वास करती हैं।

हम आपकी ही हैं, आपकी दासियाँ हैं।
आपकी एक झलक हमारे प्राण लौटा देती है।

आपकी कथाएँ अमृत हैं —
वे जले हुए जीवन को शीतल करती हैं,
पापों को नष्ट करती हैं
और आत्मा में फिर से जीवन भर देती हैं।”

गोपी गीत का मूल भाव यही है:
“हमें कुछ नहीं चाहिए… हमें सिर्फ आप चाहिए।”


💔 विरह का दर्शन – गोपी गीत इतना शक्तिशाली क्यों है?

कृष्ण-भक्ति में दो भाव माने गए हैं:

मिलन
विरह

गोपी गीत विरह की चरम अवस्था है।
भगवान सामने नहीं हैं, फिर भी उनका अनुभव सबसे गहरा है।

इसीलिए संत कहते हैं:
“जहाँ मिलन समाप्त होता है, वहीं असली भक्ति शुरू होती है।”


🌼 गोपी गीत पढ़ने / सुनने के लाभ

• मन का भारीपन हल्का होता है
• भक्ति में गहराई आती है
• अहंकार धीरे-धीरे गलने लगता है
• प्रेम और करुणा बढ़ती है
• ध्यान में स्थिरता आती है

कई भक्तों का अनुभव है कि गोपी गीत सुनते समय आँखें अपने आप भर आती हैं —
जैसे आत्मा किसी पुराने, भूले हुए रिश्ते को याद कर लेती हो।


🌺 गोपी गीत और आज का इंसान

आज का इंसान सब कुछ चाहता है —
पैसा, पहचान, अधिकार, नियंत्रण।

लेकिन गोपी गीत हमें उल्टा सिखाता है:
“कुछ मत चाहो… सिर्फ उन्हें चाहो।”

जब जीवन में सब कुछ होते हुए भी भीतर खालीपन महसूस हो,
तब गोपी गीत एक spiritual medicine की तरह काम करता है।


🕉️ भक्ति का मनोविज्ञान – गोपी गीत दिल को क्यों छूता है?

क्योंकि इसमें:

• कोई माँग नहीं
• कोई शर्त नहीं
• कोई भय नहीं
• सिर्फ प्रेम है

और यही pure devotion है।


🔔 गोपी गीत कब पढ़ना सबसे अच्छा माना जाता है?

• जब मन अशांत हो
• जब ध्यान नहीं लग रहा हो
• जब भावनात्मक खालीपन महसूस हो
• जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा, एकादशी
• सोने से पहले (अत्यंत गहरा प्रभाव)


🌸 अंतिम भाव

गोपी गीत हमें यह नहीं सिखाता कि भगवान कैसे मिलते हैं।
गोपी गीत यह सिखाता है कि
भगवान के बिना रहा कैसे नहीं जाता।

इसी कारण Gopi Geet Lyrics आज भी उतनी ही जीवित हैं,
जितनी हजारों वर्ष पहले थीं।


❓ FAQs – Gopi Geet Lyrics

Q1. गोपी गीत कहाँ से लिया गया है?

श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध, अध्याय 31 से।

Q2. गोपी गीत का मुख्य भाव क्या है?

विरह भक्ति — भगवान के प्रति निस्वार्थ प्रेम और तड़प।

Q3. क्या गोपी गीत रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, रोज पढ़ना या सुनना मन को अत्यंत शांति देता है।

Q4. गोपी गीत में कुल कितने श्लोक हैं?

कुल 19 श्लोक हैं।

Q5. गोपी गीत पढ़ने का श्रेष्ठ समय क्या है?

रात को सोने से पहले या ब्रह्म मुहूर्त में।

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Sagar Thakur

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